परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

सबसे पहली ब्रजभाषा की गजल - अपनी खुसी सों थोरें ई सब नें करी सही

अपनी खुसी सों थोरें ई सब नें करी सही । 
बौहरे नें दाब-दूब कें करबा लई सही ॥ 

 यै सोच कें ई सबनें उमर भर दई सही ।
समझे कि अब की बार की है आखरी सही ॥

पहली सही नें लूट लयो सिगरौ चैन-चान ।
अब और का हरैगी मरी दूसरी सही ॥


मन कह रह्यौ है बौहरे की बहिय’न कों फार देंउ ।
फिर देखों काँ सों लाइहै पुरखा’न की सही ॥


धौंताए सों नहर पै खड़ो है मुनीम साब ।
रुक्का पे लेयगौ मेरी सायद नई सही ॥


म्हाँ- म्हाँ जमीन आग उगल रइ है आज तक ।

घर-घर परी ही बन कें जहाँ बीजरी सही ॥


तो कों भी जो ‘नवीन’ पसंद आवै मेरी बात ।
तौ कर गजल पे अपने सगे-गाम की सही ॥

  
सही – हस्ताक्षर, बोहरा – ब्याज पर कर्ज देने वाला, हरैगी – हर लेगी, छीन लेगी मरी – एक ब्रजभाषा का सम्बोधन; धौंताए सों – सुबह तड़के से; रुक्का – ऋणपत्र; बीजरी – बिजली;  

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