परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

नयन क्यों आप के तर है रहे हैं

 नयन क्यों आप के तर है रहे हैं।

ये अँसुआ तौ हमारे भाग के हैं॥

 

बने हौ आप जब-जब भोर के पल।

हम'उ तब-तब सुमन जैसें झरे हैं॥

 

तनिक देखौ तौ अपनी देहरी कों।

जहाँ हम आज हू बिखरे परे हैं॥

 

हृदय-सरवर मधुर क्यों कर न होवै।

किनारे आप के रस में पगे हैं॥

 

उलझ कें आप सों नयना हमारे।

सियाने सों दिवाने है गये हैं॥

 

हृदय-प्रासाद में आए हौ जब सों।

"उजाले'न के झरोखा खुल रहे हैं"

 

अरे ऊधौ हमें उपदेश दै मत।

हमारे भाग में दुखड़ा लिखे हैं॥

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