परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

कमल, गुलाब, जुही, गुलमुहर बचात भये

कमल, गुलाब, जुही, गुलमुहर बचात भये ।
महक रहे हैं महकते नगर बचात भये ॥

 

ये काहु युद्ध में लड़ कें भये न क्षत-विक्षत ।
इन्हें तौ घाव मिले हैं समर बचात भये ॥

 

भलें ही मौन रहत हैं विरक्त जैसे किन्तु ।

नजर में सब कों रखत हैं नजर बचात भये ॥

 

इन्हीं नें ढुँढ कें परचाय कें बनाये हैं ।

नवीन पन्थ पुरानी डगर बचात भये ॥

 

ये खण्डहर नहिं ये तौ धनी हैं महल’न के ।

बिखर रहे हैं जो बच्च’न के घर बचात भये ॥

 

समर – युद्ध, झगड़े;

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