पुण्य चैंयें मगर हवन के बिन ।
लाभ चैंयें मगर जतन के बिन॥
खूब चोखे हैं आज के नागर ।
मेघ चैंयें मगर तपन के बिन॥
ऐसी गैया कहाँ सों लामें अब
।
दै सकै दूध जो थन’न के बिन॥
जिन्दगी व्यंजना बिना कैसी ।
अप्सरा और बाँकपन के बिन॥
राम कों राम मानते का हम ।
लंक-विध्वंस, वन-गमन के बिन ॥
जीव कों आसरौ तौ चैंयें ही ।
सेज सूनी लगै सजन के बिन ॥
चोखे – अच्छे,
भले; नागर – नगर निवासी, लोग;
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