परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

रास, रस, अनुराग सों अनुरक्त अभिलाषा बहत है

 रास, रस, अनुराग सों अनुरक्त अभिलाषा बहत है ।

जो अधूरी रह गयी नयन’न सों वौ आशा बहत है ॥

 

जो तुम्हारे छल, कपट और झूठ सों जनमी है वौ ही ।

अश्रुधारा बन दृगन सों प्रेम की भाषा बहत है ॥

 

आप नें जो आन भाखी वौ हुती झूठी कि साँची ।

बस यही शंका दृग’न सों बनि कें जिज्ञासा बहत है ॥

 

आप की हर एक अति कों हमनें यति बनि कें सह्यौ है ।

अब दृग’न सों रात दिन धीरज की परिभाषा बहत है ॥

 

सूर नें जा कों सजायौ और मीरा नें रचायौ ।

ब्रजगजल में हू वही कान्हा की ब्रजभाषा बहत है ॥

 

आन – सौगन्ध, प्रतिज्ञा; भाखी – बोली; यति – भिक्षुक;

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