नैन-सैन’न सों ही प्रेम-रस भर दियौ ।
उरबसी उर्वशी नें गजब कर
दियौ॥
एक बाँकी नें या की न वा की
सुनी ।
इक सुमन नें सुमन पै सुमन धर दियौ॥
चाम नें चाम सों चाम की छब
लखी । *
काम नें काम कों काम कौ कर
दियौ॥ **
प्रीत नें प्रीत सों प्रीत
की पत रखी ।
फिर सुरा नें सुरा कों सरोवर
दियौ॥
हीय में दौनों दौनों’न के बस गये ।
यै कहा सोचनों कौन नें घर
दियौ॥
नैन-सैन – आँखों का इशारा,पत
– लाज; सुरा – मय, शराब;
* चाम – शरीर ने आँखों से
प्रिया / प्रियतम के सुन्दर शरीर और उस पर की विभिन्न मुद्राओं,कोणों,रेखाओं
आदि को निहारा;
* कामदेव से जुड़े उक्त
क्रियाकलाप ने इस कार्य को उपयोगी बना दिया
No comments:
Post a Comment