परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

खसबुअन के बासतें खुद धूप गूगर ह्वै गए

 खसबुअन के बासतें खुद धूप गूगर ह्वै गए।

देख लै दुनिया हम'उ तेरे बरब्बर ह्वै गए॥

 

एक बेरी साँच में घनश्याम नें बोल्यौ हो झूठ।

तब सों ही ऊधौ हमारे द्रग समन्दर ह्वै गए॥

 

अब न कोऊ चौंतरा लीपै न छींके टाँगत्वै।

कैसे-कैसे घर हते, सब ईंट-पत्थर ह्वै गए॥

 

जैसें तैसें आदमीयत कौ हुनर सीख्यौ मगर।

हाय कैसौ बख्त आयौ - फिर सों बन्दर ह्वै गए॥

 

ऐसी अदभुत बागबानी कौन सों सीखे 'नवीन'

ऐसे-ऐसे गुल खिलाए खेत बंजर ह्वै गए॥

No comments:

Post a Comment