भव्यता कौ अचार डारें का ।
वास्तविकता बिसार डारें का ॥
खीर लग तौ गयी है निस्सन्देह
।
और या कों बिगार डारें का ॥
बेटिकट चल रही है जुग्ग’न
सों ।
लालसा कों उतार डारें का ॥
हम तिजोरी तौ दै चुके कबकी ।
अब खजाने हु झार डारें का ॥
नित्य उपदेश पेल डारत हौ ।
आतमा कों उघार डारें का॥
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