परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

अब जैसें हू भई है भलाई भई तौ है

अब जैसें हू भई है भलाई भई तौ है।
असफल-जतन नें लीक दिखाई भई तौ है॥
 
देखें घड़ी लगन की सुधावत है का घड़ी।
परमातमा के संग सगाई भई तौ है॥
 
आखिर दरस दिखान में इतनौ सँकोच क्यों।
हम दर्पन'न ने धूनी रमाई भई तौ है॥
 
अब उन की नाँय नें तौ हमारी गरज सही।
उन के हजूर अपनी रसाई भई तौ है॥
 
बादाखिलाफ कैसें भये हम बताउ तौ।
अँसुअ’न नें पाई-पाई चुकाई भई तौ है॥
 
दाबें नहीं दबै है दरप या मकान कौ।
हैबे कों कुल बदन की तराई भई तौ है॥
 
यै और बात है कि सुनाई न पर सकी।
ब्रज की गजल नें टेर लगाई भई तौ है॥ 

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