अनवरत उत्तुंग ध्वज फहरै हमारे हिन्द कौ
विश्व मस्तक पै तिलक सोहै
हमारे हिन्द कौ
जैसें ध्रुव तारौ गगन में
देर तक चमक्यौ करै
नाम त्यों ब्रह्माण्ड में चमकै हमारे हिन्द कौ
पक्ष में ज्यों शुक्ल के
चन्दा सतत बढतौ रहै
नाम त्यों त्यों रात दिन
निखरै हमारे हिन्द कौ
जैसें नन्दन वन की डार’न पै
सुमन महक्यौ करें
वैसें ही पग-पग सु-यस महकै हमारे हिन्द कौ
आन बान और सान कौ बरनन स्वयं
सारद करें
हर हृदय कों मरतबा मोहै हमारे हिन्द कौ
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