परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

ठौर-ठौर’न पै घाट-घाट लगें

 ठौर-ठौरन पै घाट-घाट लगें ।

राग अनुराग वारी हाट लगें ॥

 

जिंदगी हू तौ इक नुमाइस है ।

खोमचा लग गये तौ चाट लगें ॥

 

है गयी ब्यारू तौ भटकनों का ।

राम कौ नाम लेहु, खाट लगें ॥

 

लाभ लूटौ सकल समष्टि के ।

या सों पहिलें कि बायकाट लगें ॥

 

संत हम तौ उन्हीं कों बोलिंगे ।

जिन कों महँगे वसन हू टाट लगें ॥

 

एक दरपन नें यों कह्यौ हमसों ।

हैं विराट आप तौ विराट लगें ॥

 

शीत के काम सब सँगेठौ शीघ्र ।

या सों पहिलें कि चिरचिराट लगें ॥

 

हाट – बाजार, ब्यारू – डिनर; समष्टि – दुनिया; वसन – कपड़े;

No comments:

Post a Comment