ठौर-ठौर’न पै घाट-घाट लगें ।
राग अनुराग वारी हाट लगें ॥
जिंदगी हू तौ इक नुमाइस है ।
खोमचा लग गये तौ चाट लगें ॥
है गयी ब्यारू तौ भटकनों का
।
राम कौ नाम लेहु, खाट लगें ॥
लाभ लूटौ सकल समष्टि के ।
या सों पहिलें कि बायकाट
लगें ॥
संत हम तौ उन्हीं कों
बोलिंगे ।
जिन कों महँगे वसन हू टाट
लगें ॥
एक दरपन नें यों कह्यौ हमसों
।
हैं विराट आप तौ विराट लगें
॥
शीत के काम सब सँगेठौ शीघ्र
।
या सों पहिलें कि चिरचिराट
लगें ॥
हाट – बाजार,
ब्यारू – डिनर; समष्टि – दुनिया; वसन – कपड़े;
No comments:
Post a Comment