परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

मधुर तौ है मगर मीठी न समझौ

 मधुर तौ है मगर मीठी न समझौ ।

बड़ी बाँकी है यै सीधी न समझौ ॥

 

पियालौ एक और प्यासे हजारन ।

सियानी बीर है, भोरी न समझौ ॥

 

पकड़ में आय जावै तब समझियो ।

बड़ी पक्की है यै कच्ची न समझौ ॥

 

न गिन पाऔगे इतने यार या के ।

बस अपने रंग में डूबी न समझौ ॥

 

लड़ावै नैन हर प्यासे पथिक सों ।

तृषा कों आप बस अपनी न समझौ ॥

 

सियानी बीर – चतुर नारी; तृषा – प्यास, लालसा;

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