कारन झगरे कौ बनी, बस इत्ती सी बात
हम नें तौ माँगी मदद, वा नें दइ खैरात
ऐसौ बरपायौ कहर, शशि नें मोहि निहार
हिय सागर कों दै गयौ, लहर’न की सौगात
कहाँ सबन्ह के सामनें, कली बनें हैं फूल
कहियो वा के कान में, अपने मन की बात
चट प्रसिद्ध है जायगौ, मेरौ कहिवौ मान
हंसा कों कागा बता, और दिवस कों रात
पढ़े-लिखे कौ लाभ लै, डार मगज पै जोर
हरदम ही का पूछनों, आठ बड़ौ या सात
No comments:
Post a Comment