कितनों टैम लगैगौ यै तौ है सूरज की
मरजी पै
हमनें तौ गीले कपड़’न कों डार
दियौ है रस्सी पै
कुरता राजा कौ सिलनों हो, नाप लिखायौ मंत्री कौ
फिटिंग न बैठी तौ सर जी नें केस कर दियौ दरजी पै
को पीसत है, कौन पिसत है, कौन पिसावत का बोलें
हमकों तौ बस यै दीखत है लैन
लगी है चक्की पै
खेलन हारौ पिन्नक में है वा
कों यै दीखत ही नाँय
इक घोड़ा और एक ऊँट की नजर
गड़ी है हत्थी पै
साँचे मन सों टेर तौ हमकों
वैसें इ दौरे आमंगे
जैसें गैया दौरी आमें मनमोहन
की मुरली पै
सती प्रथा और बाल विवाह तौ
बीती बातें हैं लेकिन
नये नये नाम’न की अब हू आरी
चल रईं नारी पै
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