कस्बा, नगर,
नगरिया, देहात
में बराबर ।
रसिया सकल जगत के उतपात में बराबर ॥
दुनिया की बैयर’न की पलक’न
पै लिख रह्यौ है ।
अजहूँ जखम मिलें हैं सौगात में बराबर ॥
बिटिय’न के मन सुने तौ
सिसकि’न के बीच बोलीं ।
बनकें दिखामनौ है हर बात में बराबर ॥
सच्ची पिरीत की तौ पहिचान एक
ही है ।
या कौ असर रहै है दिन-रात में बराबर ॥
सजनी सजन सों बोली बच लेउ
गरमि’यन में ।
अबकें तुमें करोंगी बरसात में बराबर ॥
बैयर – स्त्री;
रसिया सकल जगत के उतपात में बराबर ॥
अजहूँ जखम मिलें हैं सौगात में बराबर ॥
बनकें दिखामनौ है हर बात में बराबर ॥
या कौ असर रहै है दिन-रात में बराबर ॥
अबकें तुमें करोंगी बरसात में बराबर ॥
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