परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

रसज्ञ-वृन्द कों रसिया अगर सुनाने होंय

 रसज्ञ-वृन्द कों रसिया अगर सुनाने होंय

तौ यै जरूरी है मन में तरल-तराने होंय

 

करील-वृक्ष पै काँटें उगेंरसाल नहीं

सुभाउ बदलौ जो रूठे सजन मनाने होंय

 

सबद-सबद में शहद घोलिवौ जरूरी है

करौ सनेह जो नेही निकट बुलाने होंय

 

निरे सलिल सों  पनपें सनेह के पादप

हवा बनाउ जो सुरभित-सुमन खिलाने होंय

 

सब कों देह धरे के धरम निभाने परें

वे लाल होंयलली होंय या फलाने होंय

 

सकल नदी कौ गन्तव्य तौ समुद्र हि है

पै यै हु इष्ट है या के लिएँ मुहाने होंय

 

नवीन विश्व सों बस यै ही कहनों है हमकों

भलें ही हेतु नवल होंयहित पुराने होंय

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