विसर्जित व्यर्थ कौ अवसाद भारत नें ही करवायौ
मधुरतम प्रेम कौ आस्वाद भारत
नें ही करवायौ
कभू शबरी के माध्यम सों कभू
कुब्जा के माध्यम सों
शिखर औ शून्य कौ सम्वाद भारत नें ही करवायौ
स्वयं कों भूल कें जब-जब कोऊ मानव बन्यौ दानव
छटी कौ दूध वा कों याद भारत
नें ही करवायौ
भलें पोखर, सरोवर, कूप काहू नें हु बनवाये
तृषा कौ त्याग में अनुवाद
भारत नें ही करवायौ
भलें या नाम सों या और काहू
नाम सों मानों
धरा पै धर्म कौ घन-नाद भारत नें ही करवायौ
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