कष्ट तौ तुम हू सहौगे मान जाऔ
हम बिना कैसें जियौगे मान
जाऔ
वस्त्र फाटें तौ रफू करिवौ
सरल है
मन रफू कैसें करौगे मान जाऔ
शुभ घड़ी है आज मन के काज
कीजै
कब तलक कल कल करौगे मान जाऔ
लिख हमारौ नाम देखौ तौ मिटइ
कें
आप हाथ’न कों मलौगे मान जाऔ
वा बिरह की जोत सों लिपटौ न
ऐसें
होम की समिधा बनौगे मान जाऔ
तीन डग आगें धरौ हौ चार
पाछें
ऐसें कैसें बढ़ सकौगे मान जाऔ
गिरह कौ शेर:
लाभ के अवसर निरन्तर घट रहे
हैं
“ और कब तक जिद करौगे मान
जाऔ “
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