कुहासौ छँट गयौ और उजीतौ ह्वै गयौ है ।
गगनचर चल गगन कों सवेरौ ह्वै गयौ है ॥
हुतो वौ इक जमानौ कह्यौ
कर’तो जमानौ ।
चलौ जमना किनारें - सवेरौ ह्वै गयौ है ॥
अगल-बगल’न छतन सों कहाँ
सुनिवौ मिलै अब ।
कि अब जामन दै बैरी - सवेरौ ह्वै गयौ है ॥
न कुकड़ूँ-कूँ भई और न जल
झर’तै हवा सों ।
तौ फिर हम कैसें मानें - सवेरौ ह्वै गयौ है ॥
गगनचर चल गगन कों सवेरौ ह्वै गयौ है ॥
चलौ जमना किनारें - सवेरौ ह्वै गयौ है ॥
कि अब जामन दै बैरी - सवेरौ ह्वै गयौ है ॥
तौ फिर हम कैसें मानें - सवेरौ ह्वै गयौ है ॥
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