परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

किनारे क्यों बनें हमलोग

किनारे क्यों बनें हमलोग ।

निरन्तर क्यों कटें हमलोग ॥

 

बिरज कौ अर्थ सेतु है ।

उतारें पलटनें हमलोग ॥

 

भरे हैं तीर तरकश में ।

समर सों क्यों हटें हमलोग ॥

 

समय कम्प्यूटर’न कौ है ।

पहाड़े क्यों रटें हमलोग ॥

 

हवन कीन्हे, हवन करिहें ।

वचन सों क्यों नटें हमलोग ॥

 

अकेले परि गये तौ का ।

चलौ मिलि कें खटें हमलोग ॥

 

नहीं जब साँच कों कछ आँच ।

कहानी क्यों गढ़ें हमलोग ॥

 

सेतु – पुल; समर – युद्ध; हवन – श्रम, युक्ति और सदिच्छा के साथ किया गया लोक-कल्याणकारी कार्य; नटना – वचन से मुकरना; खटना – मिल कर किसी कार्य सिद्धि के लिये जी जान से जुट जाना;

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