चिडिय’न में ढेला मत मारौ
खेत’न बीच बिजूका गाड़ौ
यों तौ घुट कें मर जाऔगे
मन के द्वार, झरोका खोलौ
सरदी में हू गरमी लगिहै
सावन में साजन सँग भींजौ
राधे राधे खूब रटौ तुम
लेकिन मीरा कों मत भूलौ
भटक रहे हौ जा संगत में
वा सों रस्ता हू तौ पूछौ
दाँत’न सों कुतरौ मत प्यारे
मिसरी हौलें हौलें चूसौ
खोल तिजोरी पुण्य करौ कछु
सत्त नारायन सी मत बाँचौ
कब तक गाल बजाऔगे तुम
छोड़ बहाने हाथ बटाऔ
गिरह कौ शेर :
हर बेरा नैं कौ मतलब है
“ नाच न आवै आँगन टेढ़ो “
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