अनाड़ी हो प गोताखोर निकरौ।
नवल रसिया बड़ौ बरजोर निकरौ॥
हृदय-नद के किनारे नप्प डारे।
सजन सच्च'उँ चपल-चितचोर निकरौ॥
कहा मन की सघनता कों बखानें॥
कि मन में तौ क्षितिज कौ छोर
निकरौ॥
मवाद इतनौ बढौ, इतनौ बढौ कि।
सहनशक्ती कौ फोरा, फोर - निकरौ॥
निकस जातो हृदय सों छाना-माना।
मगर वौ निरदई, घर, तोर - निकरौ॥
सपत्तौ लील ही डारौ है मो
कों।
"तिहारौ गम तौ आदमखोर निकरौ"॥
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