परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

पास के सम्बन्ध फीके लग रहे हैं

 पास के सम्बन्ध फीके लग रहे हैं ।
दूर वारे ढ़ोल नीके लग रहे हैं ॥
 
धन-बिमारन की दवा-दारू की खातिर ।
हाल के बच्चन कें टीके लगे रहे हैं ॥
 
जर रही है ज्योत वा कों कौन पूछै ।
चक्क जयकारे बुझी के लग रहे हैं ॥
 
ऐसी बन्दर-बाँट बन्दर हू लजामें ।
सब स्वजन सुग्रीव ही के लग रहे हैं ॥
 
लग गयी है लॉटरी आश्रम की शायद ।
भोग अब तौ शुद्ध घी के लग रहे हैं ॥
 
नाम अंग्रेजी भलें ही क्रीम कौ है ।
लेप तौ बेसन दही के लग रहे हैं ॥
 
मन में कछ श्रद्धा हू है या मन्दिरन में ।
मात्र चक्कर मूरती के लग रहे हैं ॥

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