पास के सम्बन्ध फीके लग रहे हैं ।
दूर वारे ढ़ोल नीके लग रहे हैं ॥
धन-बिमार’न की दवा-दारू की खातिर ।
हाल के बच्च’न कें टीके लगे रहे हैं ॥
जर रही है ज्योत वा कों कौन
पूछै ।
चक्क जयकारे बुझी के लग रहे हैं ॥
ऐसी बन्दर-बाँट बन्दर हू
लजामें ।
सब स्वजन सुग्रीव ही के लग रहे हैं ॥
लग गयी है लॉटरी आश्रम की
शायद ।
भोग अब तौ शुद्ध घी के लग रहे हैं ॥
नाम अंग्रेजी भलें ही क्रीम
कौ है ।
लेप तौ बेसन दही के लग रहे हैं ॥
मन में कछ श्रद्धा हू है या
मन्दिर’न में ।
मात्र चक्कर मूरती के लग रहे हैं ॥
दूर वारे ढ़ोल नीके लग रहे हैं ॥
हाल के बच्च’न कें टीके लगे रहे हैं ॥
चक्क जयकारे बुझी के लग रहे हैं ॥
सब स्वजन सुग्रीव ही के लग रहे हैं ॥
भोग अब तौ शुद्ध घी के लग रहे हैं ॥
लेप तौ बेसन दही के लग रहे हैं ॥
मात्र चक्कर मूरती के लग रहे हैं ॥
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