परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

ब्रज के सिवाय होयगी अपनी बसर कहाँ

 ब्रज के सिवाय होयगी अपनी बसर कहाँ।

ब्रज-भूमि कों बिसार कें जामें किधर? कहाँ?

 

कनुआ सों दिल लगाय कें हम धन्य है गये।

अन्यान्य की पिरीत में ऐसौ असर कहाँ॥

 

सूधे-सनेह की जो डगर ब्रज में है हजूर।

दुनिया-जहान में कहूँ ऐसी डगर कहाँ॥

 

तन के लिएँ तौ ठौर घनी हैं सबन्ह के पास।

बबुआ मगर बसाउगे मन के नगर कहाँ॥

 

उपदेस ज्ञान-ध्यान रखौ आप ही 'नवीन'

जिन के खजाने लुट गये विन कों सबर कहाँ॥

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