परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

लौट कें ब्रज में काहें आऔगे

 लौट कें ब्रज में काहें आऔगे ।

आप तौ द्वारिका बसाऔगे ॥

 

और तौ कौन पै चलैगौ जोर ।

नन्द-जसुधा ही कों रुलाऔगे ॥

 

लूटि नवनीत हम गरीब’न कौ ।

आप तौ धूर में मिलाऔगे ॥

 

राधिका कों बिसारि कें मोहन ।

आप तौ रुक्मिणी कों लाऔगे ॥

 

खाल तरुअ’न की छिल गई कान्हा ।

और कब तक हमें नचाऔगे ॥

 

दुक्ख माँगे, परोस डारे दुख । *

का सुख’न कों नहीं चखाऔगे ॥

 

है जरूरत हमें तुम्हारी आज ।

का कुरुक्षेत्र में ही आऔगे ॥ **

 

 

नवनीत – माखन;

* कुंती द्वारा कृष्ण से पीड़ाओं की याचना का सन्दर्भ

** सूर्यग्रहण के दौरान कुरुक्षेत्र में ब्रजवासियों से मिलन का सन्दर्भ

No comments:

Post a Comment