जा दिना सों कृपा आपकी है
गयी दोउ हाथ’न सों आनन्द लूटन लगे
याद कीजै कभू तौ वौ स्वर्णिम
घड़ी हेर कें टेर कें घेर कें छेर कें
आप हमकों जो माखन चखामन लगे स्याँप सौत’न की छतिय’न पै लोटन लगे
प्राणधन वौ महीना हुतो फाग
कौ जब धरा कों गगन नें मगन कर दियौ
हमनें झोरी पसारी जो अनुराग
की आपके नैन माधुर्य ओझन लगे
लोग बोलें सो बोल्यौ करें
सौक सों काहु की हम सुनें तौ सुनें का लिएं
साँच कों आँच का, हम
जो आगें बढ़े, आप हू प्रीत की डोर खेंचन लगे
आप कों हम बुलामें तौ इतरात
हौ, खूब
तरसात हौ, भाव हू खात हौ
सोचौ तौ का दसा होयगी आपकी
आपकों कल जो हम हू सतावन लगे
गिरह कौ शेर :
कल वे साँचे सनेही मिले तौ
सखी साँकरी खोर में ऐसौ बानक बन्यौ
“ मन लुभावन छटा कों बिखेरत
भये ज्यों ही बदरा घिरे मोर नाचन लगे “
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