धरती पै हर व्यक्ति बराबर है भैया ।
कंकर-कंकर में शिवशंकर है भैया ॥
कछ लोग’न कों जीवन है नन्दन-कानन ।
कछ लोग’न कों जीवन नश्वर है भैया ॥
तन बेचारौ करि-करि कें हू का
करिहै ।
रुत भौजाई मनुआ देवर है भैया ॥
कद-काठी वारौ तौ ऊपर वारौ है
।
अपनी मरजी राई बराबर है भैया ॥
जब देखौ तब क्लास लगावै वोटर
की ।
हर नेता विद्वान धुरंधर है भैया ॥
लिप्सा के जैसौ ही लालच होवै
है ।
बन्दरिया है बहना, बन्दर है भैया ॥
प्रकट तत्व हू नाँहि दिखे तौ
भेद खुलौ ।
असली उजियारौ तौ भीतर है भैया ॥
कंकर-कंकर में शिवशंकर है भैया ॥
कछ लोग’न कों जीवन नश्वर है भैया ॥
रुत भौजाई मनुआ देवर है भैया ॥
अपनी मरजी राई बराबर है भैया ॥
हर नेता विद्वान धुरंधर है भैया ॥
बन्दरिया है बहना, बन्दर है भैया ॥
असली उजियारौ तौ भीतर है भैया ॥
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