शुद्ध, सात्विकअन्न खाऔ तौ सही ।
पुष्ट काया कों बनाऔ तौ सही ॥
खूब ध्वज फहराउ अपने धर्म के ।
किन्तु कछ सिस्टम बनाऔ तौ सही ॥
पाप का है भूल का अपराध का ।
बाल-बच्च’न कों सिखाऔ तौ सही ॥
ब्रजगजल की एक पुस्तक ही भलें ।
मोल दै कें घर में लाऔ तौ सही ॥
ब्रजगजल कों पढ़ चुके हौ आप तौ ।
का लगौ पढ़ कें, बताऔ तौ सही ॥
मन मगन होवै तभी बानक बनें ।
बेसुरे ही गीत गाऔ तौ सही ॥
पुष्ट काया कों बनाऔ तौ सही ॥
खूब ध्वज फहराउ अपने धर्म के ।
किन्तु कछ सिस्टम बनाऔ तौ सही ॥
पाप का है भूल का अपराध का ।
बाल-बच्च’न कों सिखाऔ तौ सही ॥
ब्रजगजल की एक पुस्तक ही भलें ।
मोल दै कें घर में लाऔ तौ सही ॥
ब्रजगजल कों पढ़ चुके हौ आप तौ ।
का लगौ पढ़ कें, बताऔ तौ सही ॥
मन मगन होवै तभी बानक बनें ।
बेसुरे ही गीत गाऔ तौ सही ॥
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