सरगम की धुन गढिवे वारे साज हवा में उड़ रए हैं ।
कल रस्त’न पै चलिवे वारे आज
हवा में उड़ रए हैं ॥
छत पै सोये बच्च’न नें जब
अम्बर में देखे बदरा ।
उछर कें बोले पानी वारे जहाज
हवा में उड़ रए हैं ॥
ऐसौ लागत है जैसें पुखराज
हवा में उड़ रए हैं ॥
और कहाँ टिकते भैया जी सब की
काया सब के मन ।
महारानी धरती पै हैं महाराज
हवा में उड़ रए हैं ॥
अरे बावरे मेरे मन तू काहे
कों अभिमान करै ।
बड़े-बड़े राजा-रानि’न के ताज हवा में उड़ रए हैं ॥
ल्हौरै-ल्हौरे – छोटे-छोटे;
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