भूलि कें हू भ्रमित न होनों है ।
बीज तौ प्रेम ही कौ बोनों
है॥
भोले-भगवान आप जानत हौ ।
भार नंदी कों ही तौ ढोनों है॥
क्यों न केवट अभी उठावै लाभ
।
राम कों गंग-पार होनों है॥
और सब कछ भलें ही छिन जावै ।
आप कौ संग नाँय खोनों है॥
मात्र हम ही नहीं फरेबी हैं
।
दाग यै तौ तुम्हें हू धोनों
है॥
सूई घनश्याम,
आतमा है तार ।
मात्र सूई में तार पोनों है॥
रस असल तत्व है मेरे प्यारे
।
रस बिना सब सपन सलोनों है॥
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