रोय, हँस-बोल कें इक रोज निमट जामें हैं
दिन मुसीबत के हरिक हाल में
कट जामें हैं
जीउ जब विनके जमाने सों उचट
जामें हैं
नेह के मेह सनेहि’न सों लिपट जामें हैं
हम कहा जानें जबान और बफा की
कीमत
हम तौ हर दिन ही कसम खाय पलट
जामें हैं
वाय मिल पाय कछू टैम तौ कछ
बात बनै
जायवे कों तौ हमूँ वा के
निकट जामें हैं
राधे रानी जू अगर रूठें तौ
रूठें हू कब
अब तौ कान्हा ई बिना बात
बिनट जामें हैं
ऐसे लोग’न कों तनिक बुद्धी
बखस देउ प्रभू
जो कि सण्डे कों अचानक ही
प्रगट जामें हैं
हम कों रँगियो तौ फकत प्रीत
के रंग’न सों 'नवीन'
और सब रंग तौ द्वै दिन में
उकट जामें हैं
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