परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

ध्यान सों देखौ तौ लगभग हर महीना बह रहे हैं

 ध्यान सों देखौ तौ लगभग हर महीना बह रहे हैं ।

ताप के मारें हिमालय के पसीना बह रहे हैं ॥

 

मार डारे भीड़ नें मनजीत और मरियम कहूँ पै ।

तौ कहूँ दरिया’न में सूरज-सकीना बह रहे हैं ॥

 

वा रे ऊपर वारे तेरी खसबु’अन के रूप धर कें ।

काशी-मथुरा तौ कहूँ मक्का-मदीना बह रहे हैं ॥

 

व्योम की आकाशगंगा में अनादिकाल सों ही ।

कैसे-कैसे कीमती दुर्लभ नगीना बह रहे हैं ॥

 

नित-नवीन आनन्द और उत्साह की भागीरथी सम ।

गुरु-कृपा सों इल्म-नद सीना--सीना बह रहे हैं ॥

 

व्योम – आकाश; इल्म नद – ज्ञान की गंगा, गुरुशिष्य परम्परा में ज्ञान के पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ते रहने का भाव;

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