मोह सच्च’ऊँ कमाल करिगौ है ।
अश्रु पी-पी कें पेट भरिगौ
है ॥
लक्ष्य तौ कब कौ मिल गयौ
होतो ।
बीच में ताम-झाम परिगौ है ॥
भोर जा कों कहत हैं ज्ञानीजन
।
वौ समय जानें काँ ठहरिगौ है
॥
धेनु करुणा की रह गयी भूखी ।
द्वेष कौ बैल घास चरिगौ है ॥
कल्ल की बात हम करिंगे कल ।
आज कौ चक्रवात टरिगौ है ॥
धेनु – गाय
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