प्रीत जब आठौ पहर साठौ घरी बहवे लगी
नेह नद में वल्लरी सँग
वल्लरी बहवे लगी
हीय में दौनों’न के रसधार सी
बहवे लगी
नैन नैन’न सों लड़े रसमाधुरी बहवे लगी
एक बावरिया तौ पहले सों हुती
रसधार में
देख वा कों दूसरी हू बावरी
बहवे लगी
देख श्यामा श्याम के
तादात्म्य की अनुपम छटा
फुक मरी बंसी, जमुन जल में गिरी, बहवे लगी
हरि हुते तब हू जमुन जल वेग
मंथर ही हुतो
अब तौ जमुना और हू मंथर गती
बहवे लगी
भाव सरिता में सिराईं
विज्ञता, अल्पज्ञता
रेत नीचें बैठि’गी कोमल कली
बहवे लगी
गुरु कृपा सों बोध की बरखा
भई जो अनवरत
वौ ही अनहद नाद बन कें गंग
सी बहवे लगी
जन्म जन्मान्तर के पुण्य’न
सों मिल्यौ ब्रज में जनम
भाग मेरे खुल गये रसमाधुरी
बहवे लगी
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