हम चाँदी थोरें ही काट रहे हैं भैया ।
चेंटा हैं सो चीनी चाट रहे
हैं भैया ॥
दुर्गन्ध’न कों हमनें थोरें
ही फैलायौ ।
हम तौ उलटे नाले पाट रहे हैं भैया ॥
गद्दी वारे काँटे हमनें हू
झेले हैं ।
चार दिना हम हू सम्राट रहे
हैं भैया ॥
अब तौ ऐसे-ऐसे माछर फूट परे हैं ॥
मच्छरदानी में हू काट रहे
हैं भैया ॥
भौजी आयी है तौ अब खुल जामें, सायद ।
अभी तलक तौ बन्द कपाट रहे
हैं, भैया ॥
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