धरा भई तौ भई कैसें गोल का जानें ।
खजाने मिल गये जिनकों वे मोल
का जानें ॥
उन्हें तौ दूध कौ छैना
बनामनों है बस ।
नमक-हराम अधम मेलजोल का
जानें ॥
चमन लगायौ है लेकिन गिने
नहीं हैं फूल ।
मजूर काम करें, नापतोल का जानें ॥
लड़कपने में गगन के विहग रहे
हमलोग ।
फँसे फिलैट में अब हम किलोल
का जानें ॥
हमारौ चन्द्र है नँदलाल और
तारे ग्वाल ।
खगोल-विज्ञ हमारौ खगोल का
जानें ॥
विहग – पक्षी; किलोल – मुक्त भाव वाली खुशी, हर्ष; खगोल-विज्ञ – आकाशीय पिण्ड आदि की जानकारी रखने
वाले विद्वान, खगोलशास्त्री
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