परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

धरा भई तौ भई कैसें गोल का जानें

 धरा भई तौ भई कैसें गोल का जानें ।
खजाने मिल गये जिनकों वे मोल का जानें 
 
उन्हें तौ दूध कौ छैना बनामनों है बस ।
नमक-हराम अधम मेलजोल का जानें ॥
 
चमन लगायौ है लेकिन गिने नहीं हैं फूल ।
मजूर काम करें, नापतोल का जानें ॥
 
लड़कपने में गगन के विहग रहे हमलोग ।
फँसे फिलैट में अब हम किलोल का जानें ॥
 
हमारौ चन्द्र है नँदलाल और तारे ग्वाल ।
खगोल-विज्ञ हमारौ खगोल का जानें ॥
 
विहग – पक्षी; किलोल – मुक्त भाव वाली खुशी, हर्ष;  खगोल-विज्ञ – आकाशीय पिण्ड आदि की जानकारी रखने वाले विद्वान, खगोलशास्त्री

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