परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

उर-बसी होवै न होवै उर्वसी जैसी लगै है

 उर-बसी होवै न होवै उर्वसी जैसी लगै है ।

इस्क में तौ भूतनी हू जलपरी जैसी लगै है ।।

 

बीजुरी बाजै गगन में आग लागै तन-बदन में ।

ऐसे में तौ भैंसिया हू माधुरी जैसी लगै है ।। ।।

 

सात जन्म’न के कुँआरे आदमी कों तौ महोदय ।

फुलझड़ी हू बम-पटाखेन की लड़ी जैसी लगी है ।।

 

कोउ गेंदा कों गुलाब’न सौ कहै तौ का करें हम ।

हर चिरोंटा कों चिरैया हंसिनी जैसी लगै है ।।

 

आप सों मिल कें हमें कैसौ लगै है का बतामें ।

जिन्दगी दो चार पल कों जिन्दगी जैसी लगै है ।।

 

टैस्ट तौ अमरित के जैसौ और कीमत छाछ जितनी ।

आपकी रबड़ी में हमकों गड़बड़ी जैसी लगै है ।।

 

मन भ्रमर है या भ्रमर कों नीति की बातें बताऔ ।

याहि तो हर इक कली अपनी कली जैसी लगै है ।।

 

भोर सों पहिलें कभू तरु-वल्लरी कों देखियो तुम ।

ओस की बूँद’न की माला करधनी जैसी लगै है ।।

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