इस्क में तौ भूतनी हू जलपरी
जैसी लगै है ।।
बीजुरी बाजै गगन में आग लागै
तन-बदन
में ।
ऐसे में तौ भैंसिया हू माधुरी जैसी लगै है ।। ।।
सात जन्म’न के कुँआरे आदमी
कों तौ महोदय ।
फुलझड़ी हू बम-पटाखे’न की लड़ी जैसी लगी है ।।
कोउ गेंदा कों गुलाब’न सौ
कहै तौ का करें हम ।
हर चिरोंटा कों चिरैया
हंसिनी जैसी लगै है ।।
आप सों मिल कें हमें कैसौ
लगै है का बतामें ।
जिन्दगी दो चार पल कों
जिन्दगी जैसी लगै है ।।
टैस्ट तौ अमरित के जैसौ और
कीमत छाछ जितनी ।
आपकी रबड़ी में हमकों गड़बड़ी
जैसी लगै है ।।
मन भ्रमर है या भ्रमर कों
नीति की बातें बताऔ ।
याहि तो हर इक कली अपनी कली
जैसी लगै है ।।
भोर सों पहिलें कभू तरु-वल्लरी कों देखियो तुम ।
ओस की बूँद’न की माला करधनी
जैसी लगै है ।।
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