और तौ सब कछ है बस दरपन के लाले पर गये।
ऐ रे मनमोहन तेरे दरसन के
लाले पर गये॥
घर में घुस कें वौ तेरौ माखन
चुरानौ, जूझनौ।
हाय वा मनभावती अनबन के लाले पर गये॥
देह धर डारी तिहारे नेह में
ओ प्राणधन।
मन-मरुस्थल कों मधुर-मेघ’न के लाले पर गये॥
खुद बहावैं नीर या जसुधा कौ
दुख हलकौ करैं।
नन्द की अँखिया'न कों क्रन्दन के लाले पर
गये॥
ऐ रे माखन चोर हम तेरे सखा
अब का कहें।
लोभी रसना कों तेरी जूठन के
लाले पर गये॥
हम हिलें तौ पाँय की पाजेब
हू छनछन करें।
अब तौ कान'न कों छनन-छन-छन के लाले पर गये॥
जो स्वयं सर्वज्ञ है वा सों 'नवीन' और का कहें।
मसि-कलम-कागद कों हू सब्द’न के लाले पर गये॥
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