काम इतनों बिखर परौ है का ।
लक्ष्य पूरन नहीं भयौ है का ।
याचना करिवे की लिमिट तौ होय
।
पेट अब तक नहीं भरौ है का ॥
प्रज्ज्वलित दीप कब करौगे आप
।
सेर भर घी हू कम परौ है का ॥
सबकों लै कें जहाँ पै जानों
है ।
वा पते कौ पतौ लगौ है का ॥
बावरे हम तौ हैं ही आदरणीय ।
आप कौ मन हू बावरौ है का ॥
यों नजर क्यों चुरात हौ सब
सों ।
आप नें काहु कों ठगौ है का॥
स्वप्न में कल कलिन्दजा बोली
।
यै लिख्यौ है? यही बदौ है का?
याचना – माँगना;
कलिन्द्जा –मातु श्री यमुने महारानी;
लक्ष्य पूरन नहीं भयौ है का ।
पेट अब तक नहीं भरौ है का ॥
सेर भर घी हू कम परौ है का ॥
वा पते कौ पतौ लगौ है का ॥
आप कौ मन हू बावरौ है का ॥
आप नें काहु कों ठगौ है का॥
यै लिख्यौ है? यही बदौ है का?
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