हमें अपनों समझ
कें बोलै
बतरावै तौ
जानें हम
कन्हैया
की तरें
कोऊ हमें
चाहै तौ
जानें हम
पवन बरसात
में जैसें
झुलावै है
गुलाब’न कों
हमें हू कोउ जो ऐसें ही हुलरावै तौ जानें हम
भलें ही हर घड़ी हमकों रुलावै
किन्तु वा के बाद
कन्हैया की तरें अँसुआ’न कों
पौंछै तौ जानें हम
भरै जो भक्ति भाव’न सों नहीं
जूझै अभाव’न सों
कोउ भक्त’न की किस्मत या
तरें लिक्खै तौ जानें हम
छबी नैन’न नें जो हमरे
कन्हैया जू की खेंची है
कोऊ भी कैमरा ऐसी छबी खेंचै
तौ जानें हम
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