सब कछ अगर कण्ट्रौल में है तौ परेसानी है क्यों ।
शहर’न में भिच्चम–भिच्च और
गाम’न
में वीरानी है क्यों ॥
सिगरौ सरोबर सोख कें बस बूँद
भर बरसात हैं ।
बच्च’न की मैया-बाप पै इत्ती महरबानी है क्यों ॥
बच्च’न की मैया-बाप पै इत्ती महरबानी है क्यों ॥
धरती पे तारे लायबे की जिद्द
हम नें क्यों करी?
जब कर दई तौ रात की सत्ता पे हैरानी है क्यों ॥
जा नें महाभारत करायौ और उन्नति डस लई ।
अजहू खुपडिय’न में वौ ही कीड़ा सुलेमानी है क्यों ॥
जब कर दई तौ रात की सत्ता पे हैरानी है क्यों ॥
जा नें महाभारत करायौ और उन्नति डस लई ।
अजहू खुपडिय’न में वौ ही कीड़ा सुलेमानी है क्यों ॥
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