परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

झूठे-साँचे सब उरहाने, मन के भीतर रख लीने हैं

 झूठे-साँचे सब उरहाने, मन के भीतर रख लीने हैं ।

प्रीतम की पाती पढ़ि कें छाती पै पत्थर रख लीने हैं ॥

 

सावन की सौगन्ध है तुमकों याद कबू करियो नहिं हमकों ।

हमनें हू पलक’न के पाछें मीठे-बादर रख लीने हैं ॥

 

सिगरी झूठी-साँची पतियाँ, सजन तुम्हारी सब रसबतियाँ ।

मन सों काढ़ि दई हैं केवल ढाई-आखर रख लीने हैं ॥

 

नहिं मिलनों ता कौ मातम का, मिलिगौ वा जैसौ उत्तम का ।

चन्द्र-सरोवर नाँहि मिले तौ प्रेम-सरोवर रख लीने हैं ॥

 

नैन हमारी पीर लखें नहिं, कान हमारी बात सुनें नहिं ।

प्रीतम-प्यारे तुमनें हू ये कैसे चाकर रख लीने हैं ॥

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