परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

ताल मिलत ही गान लगत हैं

 ताल मिलत ही गान लगत हैं।

कष्ट - सुरीली तान लगत हैं॥

 

शीतल-मन्द-समीर चलत ही।

दर्द पतंग उड़ान लगत हैं॥

 

बिरहिन की अँखिय'न के सपने।

दुखियारे महमान लगत हैं॥

 

सब जग इन सों खेल रह्यौ है।

हिरदे, गेंद समान लगत हैं॥

 

ज्यों ही जोवन छलकै, त्यों ही।

टहनी फूल गिरान लगत हैं॥

 

कबू लगें दुखड़ा परबत से।

और कबू मैदान लगत हैं॥

 

भोरे-लोग सुझामें रसता।

भैमी तौ भरमान लगत हैं॥

 

कैसे'उ होमें पन्थ जगत के।

लगन लगें - आसान लगत हैं॥

 

नित्य 'नवीन' सुमन सरसावत।

साजन तौ उद्यान लगत हैं॥

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