परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

हमारे पूर्व हू दौनों’न कों तोल्यौ गयौ है

 हमारे पूर्व हू दौनों’न कों तोल्यौ गयौ है ।

शकर सों लाख बेहतर नीम कों बोल्यौ गयौ है ॥

 

अजी घी-दूध का हैं अब तौ पानी हू मलिन है ।

निरन्तर अमरित’न में ही जहर घोल्यौ गयौ है ॥

 

हमारी अस्थिय’न कों तुम नदि’न में मत बहइयो ।

हमें संज्ञान है इनमें कहा रोल्यौ गयौ है ॥

 

नियति कों योजना कर कें बिगार्यौ है बिरादर ।

पहन कें बूट कच्ची छत्त पै डोल्यौ गयौ है ॥

 

न तौ जीते’न में हैं हम न ही हारे’न में हैं ।

अभी पत्ता तुरुप वारौ कहाँ खोल्यौ गयौ है ॥

 

शकर – शक्कर, चीनी; मलिन – अशुद्ध; रोलना – डालना, मिलाना, घोलना आदि; नियति – प्रकृति, कुदरत; बूट – जूता, जूते;

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