तनिक मनुहार कीजै तौ बनें बानक ।
लली कौ हिय पसीजै तौ बनें
बानक॥
सदा ही रास की अभिलास का
करनी ।
रस’न पै ध्यान दीजै तौ बनें बानक॥
लला जू शब्द केवल शब्द होवत
हैं ।
विनय रसना सों छीजै तौ बनें
बानक॥
छड़ी जादू की वा के हाथ में
ही है ।
परी कों घेर लीजै तौ बनें
बानक॥
मिलौ, बिछडौ,
तनिक तरसाउ वा कों हू ।
खिजामन-हार खीजै तौ बनें
बानक॥
बानक – संयोग;
रसना – जीभ, जुबान; खिजामन-हार – छेडने वाला;
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