परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

तनिक मनुहार कीजै तौ बनें बानक

 तनिक मनुहार कीजै तौ बनें बानक ।

लली कौ हिय पसीजै तौ बनें बानक॥

 

सदा ही रास की अभिलास का करनी ।

रसन पै ध्यान दीजै तौ बनें बानक॥

 

लला जू शब्द केवल शब्द होवत हैं ।

विनय रसना सों छीजै तौ बनें बानक॥

 

छड़ी जादू की वा के हाथ में ही है ।

परी कों घेर लीजै तौ बनें बानक॥

 

मिलौ, बिछडौ, तनिक तरसाउ वा कों हू ।

खिजामन-हार खीजै तौ बनें बानक॥

 

 

बानक – संयोग; रसना – जीभ, जुबान; खिजामन-हार – छेडने वाला;

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