परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

क्यों वृथा ही वसन उतारत हौ

 क्यों वृथा ही वसन उतारत हौ ।
बन रही बात क्यों बिगारत हौ ॥
 
बात तौ चल रही है कोयल की ।
कान के पर्दा काहें फारत हौ ॥
 
बेल, बूँटेन में हू अवसर हैं ।
मूल जड़ कों ही क्यों उखारत हौ ॥
 
एक-दो होंय तौ पढ़ें हम हू ।
रोज दस पोस्ट पेल डारत हौ ॥
 
हम अगर दान कर रहे हैं दान ।
गाँठ सों आप का निकारत हौ ॥
 
वसन – कपड़े; उचारत हौ – बोलते हो, कर रहे हो;

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