दौरिबे बारे’न में कस कें दुलत्ती दै दई ।
रेंगबे बारे’नें मैराथन की ट्रॉफ़ी दै दई॥
इक जनानी वोट दै कें या तरें
बिदकी कछू ।
जैसें वा नें काहु महिसासुर कों बेटी दै दई॥
रेंगबे बारे’नें मैराथन की ट्रॉफ़ी दै दई॥
जैसें वा नें काहु महिसासुर कों बेटी दै दई॥
मंच तक कैसें पहुँचती पीर वा
मजदूर की ।
होठ जैसें ही हिले म्होंड़े में रोटी दै दई ॥
जन्म लीनौ जा कुआँ में बाई
में मर जात हम ।
आप कौ आभार जो हाथ’न में रस्सी दै दई॥
आरती के बाद पण्डित जी नें
यों बाँट्यौ प्रसाद ।
खुद्द नें लड्डू रखे हमकों पंजीरी दै दई॥
होठ जैसें ही हिले म्होंड़े में रोटी दै दई ॥
आप कौ आभार जो हाथ’न में रस्सी दै दई॥
खुद्द नें लड्डू रखे हमकों पंजीरी दै दई॥
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