नाम कों सिद्ध करती रही रात भर
रातरानी महकती रही रात भर
एक हू बात मन की बताई नहीं
बस नख’न कों कुतरती रही रात भर
केस अदालत में वौ जीत आयी
भलें
हार कौ स्वाद चखती रही रात
भर
एक अभागन बिरहिनी के सँग सेज
हू
सिलवट’न कों तरसती रही रात
भर
अश्रु धार’न सों पूरौ महल भर
गयौ
जलमहल में टहलती रही रात भर
अम्बिका कों मिलौ अम्बुजा कौ
हियौ
हो गरजनों, लरजती रही रात भर
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