परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

                  संक्षिप्त परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी ( ब्रजगजल प्रवर्तक, बहुभाषी शायर (कवि) एवं व्यंग्यकार)

नैन झुकिवे के बाद उठते भये

 नैन झुकिवे के बाद उठते भये ।

दो सितारे गगन में उगते भये॥

 

फूल शाखा’न सों उतरते भये ।

तो सों मिलिहें स्वयं लुढ़कते भये॥

 

केश लहराये छत्त पै जा खन ।

थम गए मेघ हू बरसते भये॥

 

एक पल में ‘हाँ’ एक पल में ‘ना’ ।

झर रहे हैं गुलाब खिलते भये॥

 

अप्सरा तू धरा की है तो कों ।

अंक भरिहें गगन झिझकते भये॥

 

जा खन – जिस पल; धरा – पृथ्वी; अंक भरना – आलिंगन करना, आगोश में समाना;

No comments:

Post a Comment